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कौन न मर जाए इस सादगी पर ऐ खुदा, खफा है मगर करीब बैठे है
जब वक़्त जवाब देता है, तब गवाहो की जरूरत नहीं है
मक्खन लगाने वाले लोग ही अक्सर चुना लगा जाते है
यह कह कर मेरा दुश्मन मुझे हँसते हुए छोड़ गया
कि तेरे अपने ही बहुत हैं तुझे रुलाने के लिए !!!
आज मेरी माँ ने बताया मुझे,
बचपन मे कभी मै भी हँसता था
लिखना तो ये था की खुश हूँ तेरे बगैर भी
पर लिखने सेे पहले आँसु कागज पर गिर गये